संख्या पद्धति — त्वरित रिवीजन
प्राकृत संख्याएँ (1, 2, 3, …) और पूर्ण संख्याएँ (0, 1, 2, …) आधार हैं; पूर्णांकों में ऋणात्मक संख्याएँ भी आती हैं। परिमेय संख्या p/q के रूप में लिखी जा सकती है जहाँ q ≠ 0 — इसका दशमलव प्रसार सांत या असांत आवर्ती होता है। अपरिमेय संख्या p/q के रूप में नहीं लिखी जा सकती; इसका दशमलव प्रसार असांत अनावर्ती होता है, जैसे √2 और π। परिमेय और अपरिमेय मिलकर वास्तविक संख्याएँ बनाती हैं।
मुख्य बिंदु
- •प्राकृत ⊂ पूर्ण ⊂ पूर्णांक ⊂ परिमेय ⊂ वास्तविक
- •परिमेय = p/q, q ≠ 0
- •अपरिमेय = असांत अनावर्ती दशमलव (√2, π)
- •हर वास्तविक संख्या संख्या रेखा पर एक बिंदु है
- •संयुग्मी से गुणा करके परिमेयकरण करें